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कथक और संतुर वादन की चार प्रस्तुतियों से बच्चे सराबोर

Written By Manik Chittorgarh on 24/08/2012 | 4:15:00 pm

प्रेस विज्ञप्ति
कथक और संतुर वादन की चार प्रस्तुतियों से बच्चे सराबोर

चित्तौड़गढ़।
स्पिक मैके चित्तौड़गढ़ शाखा द्वारा इन दिनों आयोजित की जा रही विरासत-2012 के तहत गुरूवार शाम मण्डफिया (सांवलियाजी) स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में हुए संतुर वादन के जरिये विद्यार्थियों ने पं. तरूण भट्टाचार्य और तबला वादक पं. मिथिलेश कुमार झा की जुगलबंदी का आनन्द लिया। प्रधानाध्यापक रोहित सारस्वत, जिला कोषाधिकारी हरीश लड्ढा, बैंक ऑफ बड़ौदा के अग्रणी जिला प्रबन्धक डीपी बैरवा और स्पिक मैके समन्वयक जेपी भटनागर के द्वारा कलाकारों के अभिनन्दन और दीप प्रज्ज्वलन से हुए कार्यक्रम में राग चारूकैशी पर आलाप, जोड़ झाला और द्रूत का आनन्द लिया। विद्यालय समन्वयक शांतिलाल तेली ने बताया कि कार्यक्रम स्पिक मैके द्वारा लम्बे समय के बाद यहां आयोजित प्रस्तुति से विद्यार्थियों में काफी उत्साह रहा। कार्यक्रम का संचालन अध्यापक पुनित दशोरा और मालाराम चौधरी ने किया। विद्यार्थियों के द्वारा अतिथियों के सम्मान में रंगोली सजाई गई और पुष्पगुच्छ भेंट किये।

शुक्रवार प्रातः 9 बजे सेंती स्थित सेण्ट्रल अकादमी स्कूल में हुई संतुरवादन की दूसरी प्रस्तुति में लगभग 500 बच्चों ने भाग लिया। डेढ़ घंटे तक चले कार्यक्रम में बच्चों ने हिन्दुस्तानी संगीत परम्परा में धीरे-धीरे शुरूआत करते हुए आलाप, मध्यलय के साथ आगे बढ़ते हुए दू्रत तक पहुंचने के सफर का अनुभव किया। एक प्रश्न के जवाब में पं. तरूण भट्टाचार्य ने विद्यार्थियों को संतुर वाद्ययंत्र की बनावट, निर्माण प्रक्रिया और इतिहास पर जानकारी दी। देश के ख्यातनाम तबला वादक पं. मिथिलेश कुमार ने भी तबले के बारे में विस्तार से बताया। यहां प्राचार्य अश्लेष दशोरा के अनुसार विद्यार्थियों ने प्रस्तुति के बाद लगभग आधे घंटे तक आपसी संवाद द्वारा हमारी संस्कृति के बारे में कई जिज्ञासाओं के उत्तर जाने। कार्यक्रम पूर्ण रूप से विद्यार्थियों द्वारा ही संचालित किया गया। संचालन हिमांशु उपाध्याय और साक्षी ईनाणी ने किया वहीं कलाकारों की आवभगत और माल्यार्पण छात्र रिशित साहू और रूपल जैन ने किया। स्पिक मैके की ओर से पूर्व अध्यक्ष ओमस्वरूप सक्सेना और सदस्या कोमल जोशी, सीमा जोशी ने शिरकत की।

इधर राजकीय विद्यालयों में निःशुल्क रूप से आयोजित हो रही कथक कार्यशालाओं के समन्वयक जेपी भटनागर ने बताया कि चौथे दिन भी दो कार्यशालाएं सफलतापूर्वक हुई। मूलरूप से वंचित और अभी तक छुटे हुए विद्यार्थियों के बीच हमारी शास्त्रीय नृत्य शैलियों को पहुंचाने के उद्देश्य से शुक्रवार प्रातः 7ः30 बजे पहली कार्यशाला स्टेशन बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में हुई जिसका संचालन प्राचार्या सुशीला सुहालका ने किया। दूसरे कार्यक्रम की जानकारी देते हुए अध्यापक हंसराज सालवी ने बताया कि आयोजन खोर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुआ। ग्रामीण क्षेत्र में शास्त्रीय नृत्य जैसे आयोजन को लेकर विद्यार्थियों के साथ-साथ ग्रामवासियों के मन में भी बहुत उल्लास व्याप्त रहा। प्रकृति से जुड़ी हुई लीलाओं के साथ साथ पशु पक्षियों की चाल, कृष्ण से जुड़ी हुई लीलाओं और हमारे हिन्दू धर्म की देवी-देवताओं से जुड़ी मुद्राओं का परिचय कथक नृत्य द्वारा दिया गया। द्रोपदी चीरहरण और त्रम्भकेश्वर गोरी नामक दो भाव की प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम पूरा हुआ। यहां प्रस्तुति में कलाकारों का स्वागत प्रधानाध्यापक नारायणसिंह चुण्डावत, तेजपालसिंह शक्तावत, अध्यापिका सीमा पचोरी, संतोष जाट, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता निर्मला कुमावत, वार्ड पंच लक्ष्मणसिंह शक्तावत और ग्रामीणों में डालचन्द जाट, कालुलाल जाट ने किया।

25 अगस्त को कथक कार्यशालाओं का आयोजन प्रातः 9 बजे रा.उ.मा.वि. नारेला और 11 बजे रा.उ.मा.वि. सिंहपुर में होगा।


(डॉ. ए.एल. जैन)
अध्यक्ष
स्पिक मैके, चित्तौड़गढ़
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